Wednesday, September 23, 2026

Generac secures a key role in Amazon's expanding AI buildout

विदेश मंत्री मार्को रूबियो की फ़ॉक्स न्यूज़ के “फ़ॉक्स एंड फ़्रेंड्स” कार्यक्रम के ब्रायन किल्मीड, एंज़ली ईयरहार्ट और लॉरेंस जोंस के साथ बातचीत

Department of State United States of America

अनुवादअमेरिकी विदेश विभाग केसौजन्य से



अमेरिकी विदेश मंत्रालय
साक्षात्कार
मार्को रूबियो, विदेश मंत्री
फ़ॉक्स न्यूज़ के “फ़ॉक्स एंड फ़्रेंड्स” कार्यक्रम के ब्रायन किल्मीड, एंज़ली ईयरहार्ट और लॉरेंस जोंस के साथ
सितंबर 22, 2026
फ़ॉक्स एंड फ़्रेंड्स स्टूडियो
न्यूयॉर्क सिटी, न्यूयॉर्क

सवाल: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन यहां आए हुए हैं। इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या राष्ट्रपति उनसे मुलाक़ात कर सकते हैं। क्या इस बारे में आपके पास कोई जानकारी है? क्या उनकी मुलाक़ात होने वाली है? लेकिन क्या इसकी कोई सार्थकता है – क्या वह फ़ैसला लेने वाले व्यक्ति हैं, या यह मामला वापस तेहरान जाएगा?

विदेश मंत्री रूबियो: मेरा मानना है कि राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल में और अब, दोनों ही समय आपने यही देखा होगा कि वह किसी से भी बातचीत और मुलाक़ात करने के लिए तैयार रहते हैं। और उनकी दलील ये है – और याद रखिए, वह एक कारोबारी हैं, ठीक है? वह राजनीतिक नेता नहीं हैं। वह कभी काउंसिल ऑफ़ फ़ॉरेन रिलेशंस के सदस्य नहीं रहे। मेरा मतलब है, वह एक कारोबारी हैं, जो व्यावहारिकता और सामान्य समझबूझ की दुनिया से आए हैं। और सामान्य समझबूझ आपको बताती है कि किसी से संवाद और बातचीत करने में कोई नुकसान नहीं है। वास्तव में, अगर आप दूसरे पक्ष से बात करते हैं, तो कम से कम आपको यह समझने का मौका मिल सकता है कि वे कौन हैं और क्या सोच रहे हैं। हो सकता है कि इससे कुछ अच्छा हासिल न हो, लेकिन इससे कुछ बुरा भी नहीं होगा। इसलिए मेरा मानना है कि राष्ट्रपति उनसे या किसी से भी मिलने के लिए तैयार हैं। अब, इससे कोई सार्थक परिणाम निकलेगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है, क्योंकि ईरान में अंतिम निर्णय लेने वाला व्यक्ति सर्वोच्च नेता है और उनका सर्वोच्च नेता एक कट्टरपंथी शिया मौलवी है।

सवाल: तो डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि हमारे पास तीन विकल्प हैं। या तो हम उन्हें बिल्कुल तबाह कर दें, या उन्हें आर्थिक रूप से जर्जर होने दें, या फिर कोई समझौता कर लें। समझौते का विकल्प बहुत अच्छा होगा। हमें यह पसंद आएगा। लेकिन आप सही कह रहे हैं; हमारा सामना कट्टरपंथी मौलवियों से है। वे बुनियादी तौर पर या धार्मिक नज़रिए से यह मानते हैं कि कि अमेरिका को धरती से मिटा दिया जाना चाहिए और इज़रायल को भी। तो फिर हम किसी समझौते की उम्मीद भी कैसे कर सकते हैं, जब वे सोचते हैं कि अपने ईश्वर की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें परमाणु हथियार हासिल करना होगा?

विदेश मंत्री रूबियो: देखिए, समझौते या कूटनीति के दरवाज़े कभी बंद नहीं करने चाहिए क्योंकि कभी-कभी सिस्टम में चीज़ें बदल जाती हैं। हो सकता है सिस्टम बदल जाए। हो सकता है कि वहां अंदरूनी स्तर पर कुछ हो जाए या वे किसी समय व्यावहारिक फ़ैसला लें कि कूटनीति ही उनके लिए बेहतर है। लेकिन ईरान के बारे में अभी बहुत सी बातें रिपोर्ट नहीं की जा रही हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।

पहली बात, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिणी मार्ग से अब पहले से कहीं ज़्यादा तेल बाहर आ रहा है। राष्ट्रपति के आदेश पर अमेरिकी सेना ने इस मार्ग बारूदी सुरंगों से मुक्त कर दिया है, और आप हर दिन अधिकाधिक जहाज़ों को बाहर आते हुए देख रहे हैं। संघर्ष से पहले जितना तेल निकलता था, उसका एक बड़ा हिस्सा अब जलडमरूमध्य के इस मार्ग से होकर बाज़ार तक पहुंच रहा है, और यह मात्रा बढ़ती ही जाएगी।

साथ ही, ईरान से कुछ भी बाहर नहीं आ पा रहा है क्योंकि हमारी नाकेबंदी बहुत सख़्त है। कुछ भी बाहर नहीं आ रहा है। तो स्थिति यह है कि दुनिया के लिए तो ज़्यादा तेल आ रहा है, लेकिन ईरान के तेल भंडार से कुछ भी बाहर नहीं आ रहा है, और उन्हें ऐसे कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है जो वास्तव में उनकी अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंचा रहे हैं और उन्हें बड़ी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ रही है। तो ये है वर्तमान रुख। आप देखेंगे कि आने वाले हफ़्तों में उनके लिए स्थिति और बिगड़ती जाएगी, क्योंकि क्षेत्र से ज़्यादा तेल बाहर आएगा, जबकि उनकी अपनी तेल आपूर्ति बिल्कुल ठप रहेगी, और प्रतिबंधों का असर सच में दिखने लगेगा।

सवाल: तो चीन किसी न किसी तरह ग्रीनलैंड पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा था। राष्ट्रपति ने ऐसा होने नहीं दिया, लेकिन लोग घबरा गए, और अब एक समझौता हो गया है।

विदेश मंत्री रूबियो: यह एक शानदार समझौता है।

सवाल: यह इतना अहम क्यों है?

विदेश मंत्री रूबियो: ऐसा है – देखिए, ग्रीनलैंड का पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था। राष्ट्रपति ट्रंप शुरुआत से ही इसे लेकर बिल्कुल स्पष्ट थे। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला था – मिसाइल रक्षा प्रणाली, आर्कटिक की सुरक्षा और जलमार्गों की सुरक्षा – यह सब बेहद महत्वपूर्ण था। हमारे पास पहले से एक समझौता था, लेकिन उसे आधुनिक बनाने और अपडेट करने की आवश्यकता थी। अब हमारे पास एक नया समझौता है जो वास्तव में ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लिए भी बहुत अच्छा है क्योंकि यह उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

और सबसे बढ़कर, यह समझौता स्थायी है; यह हमेशा के लिए है। यानी, इस समझौते की कोई समाप्ति तिथि नहीं है। यह हमें मिसाइल रक्षा प्रणाली वगैरह के लिए जितने चाहें उतने सैन्य अड्डे बनाने की इजाज़त देता है। यह हमें डेनमार्क के साथ हमें निवेश प्रस्तावों की जांच-पड़ताल की एक प्रक्रिया में शामिल करता है, ताकि ऐसा न हो कि एक दिन आपको पता चले कि चीनी सेना तो वहां नहीं है, लेकिन उनकी कंपनियों पास सभी बंदरगाहों और ज़मीन का मालिकाना हक़ है, यानि वे वहां मौजूद हैं – क्योंकि उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ऐसा ही किया है। यह हमें कार्रवाई करने की इजाज़त देता है –

सवाल: चीन की बेल्ट एंड रोड योजना।

विदेश मंत्री रूबियो: हां, कुछ मामलों में तो उससे भी बुरा। मेरा मतलब, वे दुनिया भर में बंदरगाह बनाते हैं, जो कि सैन्य अड्डे जैसा दिखते हैं। और फिर आप सोचते हैं कि बेशक उन्होंने बंदरगाहों को ख़ास तरह से बनाया है क्योंकि एक दिन वे वहां अपनी नौसेना तैनात करने में सक्षम होना चाहेंगे। तो मुझे लगता है कि यह हमें – और यह नैटो से भी जुड़ा है, क्योंकि इसमें कहा गया है कि कोई भी गैर-नैटो देश जो ग्रीनलैंड में निवेश करने की कोशिश करता है, उसे एक स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुज़रना होगा जिसमें डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अपने साझेदारों के साथ हम शामिल होंगे और हमारा उस पर नियंत्रण होगा।

तो यह एक बहुत अच्छा समझौता है; यह एक शानदार उपलब्धि है। अगर राष्ट्रपति ने यह मुद्दा नहीं उठाया होता तो ऐसा कभी नहीं हो पाता। अमेरिका के कई राष्ट्रपतियों ने ग्रीनलैंड के भौगोलिक महत्व को समझा है। लेकिन ये पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने असल में इस दिशा में कुछ किया है। और आज वे एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो अमेरिका और हमारी सुरक्षा के लिए तो बहुत अच्छा है ही, बल्कि नैटो, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लिए भी उपयोगी है।

सवाल: – आप इस बात से कितने निराश हैं कि नैटो ने ईरान के मामले में अब तक आपकी बिल्कुल भी मदद नहीं की है?

विदेश मंत्री रूबियो: देखिए, मेरा मतलब, मुझे लगता है कि नैटो में कुछ देश ऐसे हैं जिन्होंने इस मामले में दूसरों के मुक़ाबले ज़्यादा काम किया है। मुझे लगता है कि उनमें से कुछ के, उन सभी के, अलग-अलग कारण हैं लेकिन कई मामलों में हम बहुत निराश हैं। मेरा मतलब, हम इस निराशा को छिपा नहीं सकते। सबसे बड़ी निराशा कुछ देशों से हुई, मुट्ठी भर देशों से। नैटो में हमारे सैन्य अड्डे होने की एक वजह – हमें मिलने वाले फायदों में एक ये है कि आपात स्थिति में ये हमें अपनी ताक़त का प्रदर्शन करने में सक्षम बनाते हैं।

सवाल: हां।

विदेश मंत्री रूबियो: हमारे सामने एक ऐसी ही आपात स्थिति बनी और कुछ देशों ने कहा: आप हमारे यहां के अपने सैन्य अड्डे का इस्तेमाल नहीं कर सकते। ये तो बेतुकी बात है। अगर आपात स्थिति में हम अपने सैन्य अड्डे का इस्तेमाल नहीं कर सकते, तो उस सैन्य अड्डे को बनाए रखने क्या फायदा? और सच कहूं तो, ऐसे में इस गठबंधन का क्या मतलब रह जाता है? मैं अपने पूरे करियर में नैटो का ज़बरदस्त समर्थक रहा हूं, लेकिन मुझे लगता है – मैं अक्सर यह दलील देता था कि अमेरिका के लिए नैटो का सबसे बड़ा फायदा यूरोप में मौजूद ये सैन्य अड्डे हैं, जिनकी वजह से हम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपनी ताक़त का प्रदर्शन कर सकते हैं। अगर हमें ऐसा करने से रोका जाता है, तो नैटो में हमारे शामिल होने की सबसे बड़ी वजह ही खत्म हो जाती है।

और इसीलिए हमने यह मुद्दा उठाया है। मुझे उम्मीद है कि हम उस दौर से आगे निकल चुके हैं जब ऐसा होता था। मुझे लगता है कि हाल ही में नैटो के कई देशों से हमें ज़्यादा सहयोग मिला है, जो कि अच्छी बात है। लेकिन हम अभी भी बहुत निराश हैं और यह मुद्दा उठाते रहते हैं। राष्ट्रपति अब भी अपनी निराशा ज़ाहिर करते रहते हैं।


मूल स्रोत: Secretary of State Marco Rubio With Brian Kilmeade, Ainsley Earhardt, and Lawrence Jones of Fox News “Fox & Friends” – United States Department of State

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।


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