अमेरिकी विदेश मंत्रालय
मार्को रूबियो, विदेश मंत्री
वक्तव्य
वाशिंगटन डीसी
जून 3, 2026
विदेश मंत्री रूबियो: धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय। रैंकिंग सदस्य महोदय, और समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद कि आपने मुझे यहां आमंत्रित किया। मेरा एक लिखित आरंभिक वक्तव्य है, जिसे मैं रिकॉर्ड के लिए प्रस्तुत करूंगा। मैं कोशिश करूंगा कि अपने पांच मिनट के वक्तव्य को आधा कर दूं। आइए सीधे मुद्दे पर आते हैं।
मेरे विचार से मैं विदेश मंत्रालय में मेरे पिछले 16-17 महीनों के कार्यकाल को दो बातों के रूप में वर्णित किया जा सकता है – एक ओर असाधारण सफलताओं का इतिहास, और दूसरी ओर निरंतर बनी हुई कठिन चुनौतियां। और दुनिया में हमारे सामने हमेशा ऐसी चुनौतियां बनी रहेंगी। मैं इन्हें एक-एक करके बताना चाहूंगा।
भारत और पाकिस्तान एक पूर्ण युद्ध के कगार पर थे। विदेश मंत्रालय और मैं व्यक्तिगत रूप से, उस संघर्ष को शांत करने और उसे समाप्त करने में शामिल थे – दो परमाणु शक्तियों के बीच होने वाले युद्ध को समाप्त कराने में।
उधर थाईलैंड और कंबोडिया एक युद्ध में उलझे हुए थे – कंबोडिया एक ऐसा देश है जिसके साथ लंबे समय से आमतौर पर हमारे करीबी संबंध नहीं रहे हैं। अमेरिका, और स्वयं राष्ट्रपति ने युद्धविराम बहाल कराने और उस संघर्ष को समाप्त कराने में एक अहम भूमिका निभाई – एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार।
ज़ाहिर है, गाज़ा में युद्ध का अंत करा दिया गया। इतना ही नहीं, बल्कि जितने भी बंधक बचे हुए थे, उन सभी को रिहा कर दिया गया – जिनमें जीवित बंधक और मृतकों के अवशेष शामिल थे।
आर्मेनिया और अज़रबैजान – वह संघर्ष भी समाप्त हो गया। न केवल समाप्त हुआ, बल्कि वह एक ऐसे समझौते के साथ समाप्त हुआ जिसके लिए मैंने कल समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत एक नया समृद्धि गलियारा (ट्रिप रूट) स्थापित किया जाएगा, जो दोनों देशों – विशेषकर आर्मेनिया – के लिए असाधारण आर्थिक अवसर प्रदान करेगा, साथ ही उनकी संप्रभुता का सम्मान भी सुनिश्चित करेगा।
शील्ड ऑफ़ द अमेरिकाज़ पहल की शुरुआत की गई। इसका अर्थ है कि इस गोलार्ध के 14 से अधिक देशों ने – जी हां, इस गोलार्ध के 14 देशों ने – आतंकवाद से निपटने, नशीले पदार्थों के व्यापार को खत्म करने और सुरक्षा मामलों पर हमारे साथ साझेदारी करने के लिए सहमति दी है। और हमारा मानना है कि अगले कुछ महीनों में यह संख्या और बढ़ेगी, क्योंकि विभिन्न देशों में चुनावों के माध्यम से नेतृत्व में बदलाव आने वाला है।
हमने रेयर अर्थ खनिजों पर मंत्रिस्तरीय सम्मेलन1 का आयोजन किया, जिसमें दुनिया भर के 30 से ज़्यादा देशों ने हिस्सा लिया। इन सभी देशों ने अमेरिका के नेतृत्व वाली एक पहल का समर्थन किया, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया भर में रेयर अर्थ खनिज हमारी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उपलब्ध रहें और इनके लिए चीन पर हमारी अत्यधिक निर्भरता नहीं रहे।
हमने पैक्स सिलिका प्रस्ताव की भी घोषणा की। इस पहल का लगातार विस्तार हो रहा है और अब इसमें 14 सदस्य देश शामिल हैं। ये 14 देश आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए और भविष्य में एआई के विकास के लिए बेहद ज़रूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए आपस में सहयोग कर रहे हैं।
वेनेज़ुएला में, अब हमारा सुचारू और खुला दूतावास है। हमारे लोग पहली बार वहां जा रहे हैं। स्थिति अभी वैसी नहीं है जैसी होनी चाहिए, लेकिन यह पांच महीने पहले की स्थिति से बहुत बेहतर है, और अब यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उतना बड़ा खतरा नहीं है जितना पहले हुआ करता था। हम मौजूदा स्थिति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन हमने काफी लंबा सफर तय किया है। हम निश्चित रूप से पांच महीने पहले की तुलना में आज बेहतर स्थिति में हैं।
नाइजीरिया के मामले में, जहां हम सभी, जहां हममें से कई लोग ईसाइयों के खिलाफ़ होने वाली हिंसा को लेकर काफी चिंतित थे – अब हम नाइजीरियाई सरकार और सुरक्षा बलों के साथ आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर सक्रिय सहयोग में सक्रिय सहयोग कर रहे हैं। इसमें कुछ सप्ताह पहले संचालित किया गया एक संयुक्त अभियान भी शामिल है, जिसमें देश के भीतर सक्रिय वैश्विक आइसिस नेटवर्क के दूसरे सबसे बड़े नेता को मार गिराया गया। यह सहयोग आगे भी जारी है।
प्रशांत द्वीप समूह – यानी छोटे-छोटे प्रशांत द्वीप, जो चीन की ओर से लगातार दबाव और खतरे का सामना कर रहे हैं – उन्हें इस प्रशासन से इतनी अधिक तवज्जो मिली है, जितनी पिछले 10 सालों में कुल मिलाकर भी नहीं मिली थी। और इसके ठोस परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
हमने क्वाड – जो कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक महत्वपूर्ण गठबंधन है – समूह की कई बैठकें की हैं। इनमें अभी पिछले हफ़्ते ही भारत में हुई एक बैठक, और इस साल के अंत में होने वाली एक अनुवर्ती बैठक शामिल हैं; साथ ही, साल खत्म होने से पहले क्वाड नेताओं की बैठक भी आयोजित की जाएगी।
आज जब मैं लगातार दूसरे दिन आपसे बात कर रहा हूं, अनेक वर्षों में पहली बार लेबनान की वैध सरकार के नेता और इज़रायल सरकार के प्रतिनिधि लगातार दूसरे दिन विदेश मंत्रालाय में वार्ता कर रहे हैं। हमें आशा है कि आज की बैठक एक संयुक्त वक्तव्य और कार्ययोजना के साथ समाप्त होगी, जो लेबनान में सुरक्षा की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी – ऐसी सुरक्षा जो हिज़्बुल्लाह और बाहरी किरदारों के दुर्भावनापूर्ण प्रभावों से मुक्त हो। पिछले सप्ताह पेंटागन में सैन्य स्तर पर भी उनकी इसी तरह की बैठकें हुई थीं।
हमने 32 स्वास्थ्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं; यानि 32 देशों ने अमेरिका के साथ स्वास्थ्य समझौते किए हैं। इन समझौतों के तहत, उन देशों को दी जाने वाली हमारी सहायता केवल किसी गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) को डॉलर बांटना भर नहीं होगी, जो फिर उस देश में जाकर अपनी मर्ज़ी के कार्यक्रम थोपे। इसके बजाय, हम 32 देशों के साथ साझेदारी कर रहे हैं, जिनमें से कई अफ़्रीकी महाद्वीप के हैं। इस साझेदारी के तहत हम उनके स्थानीय और घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों को सशक्त बनाएंगे। ऐसा इसलिए ताकि वे न केवल ज़मीनी स्तर पर गंभीर रूप से बीमार लोगों का इलाज सकें, बल्कि हम उनकी क्षमता और काबिलियत को बढ़ाने में भी मदद कर रहे हैं, ताकि वे भविष्य में यह काम खुद कर सकें।
यही वह चीज़ है जो ये देश चाहते हैं। वे हमेशा के लिए सहायता प्राप्तकर्ता बने रहना नहीं चाहते। वे चाहते हैं कि एक दिन वे अपने लोगों की देखभाल खुद कर सकें, और हम अपनी सहायता के हिस्से के तौर पर, उस बुनियादी ढांचे को बनाने में उनकी मदद कर रहे हैं।
मैं इस विषय में और भी बहुत कुछ कह सकता हूं, लेकिन मैं एक और बात बताना चाहता हूं। आपदा राहत के मामले में आज हम पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर स्थिति में हैं। हमारे विदेशी सहायता तंत्र के पुनर्गठन की वजह से, आज अमेरिका दुनिया भर में मानवीय सहायता की दृष्टि से आपदाओं का जवाब पहले से कहीं अधिक तेज़ी से और प्रभावी ढंग से दे सकता है। और इसका प्रमाण जमैका में हमारे सहायता प्रयास और प्रशांत क्षेत्र में आए दो चक्रवातों के बाद मदद पहुंचाने की हमारी कार्रवाई। 24 घंटे के भीतर तेज़ी से अपनी टीम भेजने और सीधे सरकारों के साथ तालमेल बिठाकर लोगों तक सहायता पहुंचाने की हमारी क्षमता आज पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर है, क्योंकि हमने लालफीताशाही को खत्म कर दिया है, बिचौलियों को हटा दिया है, और सीधे ज़रूरतमंदों तक पहुंच बनाई है।
हमारे सामने अभी भी चुनौतियां हैं। सूडान के मामले में, वहां हालात अभी भी बहुत निराशाजनक बने हुए हैं। इन बातचीत में हम साथ मिलकर चार देशों के कूटनीतिक समूह (क्वाड) के तौर पर पूरी तरह से सक्रिय हैं। जैसा कि आप में से कई लोग जानते हैं, दुर्भाग्य से सूडान कई देशों के बीच एक छद्म युद्ध का अखाड़ा बन गया है। और यूएई तथा सऊदी अरब के बीच मौजूद मतभेदों ने, इस युद्ध को खत्म करने की हमारी कोशिशों को सचमुच और भी ज़्यादा मुश्किल बना दिया है। अभी हमारा ध्यान दो शहरों – या चार शहरों, यानी हर तरफ दो-दो शहरों – की पहचान करने पर है, जो मानवीय सहायता के वितरण केंद्रों के तौर पर काम करेंगे।
लेकिन अक्षमता – नहीं – सूडान के बारे में वास्तव में निराशाजनक बात यह है कि एक पक्ष या दूसरा पक्ष किसी बात पर सहमत तो हो जाएगा लेकिन फिर वे उसका पालन नहीं करेंगे। लेकिन हम इस पर लगातार ध्यान दे रहे हैं, और हमारे पास ऐसे लोग हैं जो पूरे समय इसी काम में लगे रहते हैं। यहां तक कि करीब डेढ़ महीने पहले ही हमने एक दाता सम्मेलन भी आयोजित किया था, जहां हमें न केवल मानवीय सहायता के लिए बल्कि पुनर्निर्माण के लिए भी करोड़ों डॉलर की प्रतिबद्धता मिली। हम इस पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। यह एक निरंतर बनी हुई चुनौती है।
डीआसी और रवांडा की बात करें, तो उन्होंने एक शांति समझौता किया था। दुर्भाग्य से, उसका अनुपालन ठीक से नहीं हुआ है। हमें कुछ प्रतिबंध लगाने पड़े हैं। रवांडा की तरफ से, अब हमें कुछ हद तक अनुपालन होता दिख रहा है। इसमें प्रगति हो रही है – हालांकि यह उतनी तेज़ी से नहीं जितनी कि होनी चाहिए, लेकिन हमें उम्मीद है कि अगले महीने के मध्य तक रवांडा की सेना वहां से हट जाएगी और समझौते का अनुपालन होगा। बेशक, एम23 समूह की समस्या अभी भी बनी हुई है, जिसका समाधान किया जाना बाकी है।
तो, ये विभिन्न मुद्दे हैं। हम इस पर और भी बात कर सकते हैं। ज़ाहिर है, ईरान से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं – और मुझे पूरा यक़ीन है कि आज आपके सवालों के दौरान हम इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
तो, मैं माफ़ी चाहता हूं। इसमें चार मिनट और 55 सेकंड का समय लगा, लेकिन मैंने यथासंभव तेज़ी से बोलने की कोशिश की। धन्यवाद।
अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।
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