Friday, April 17, 2026

संयुक्तराष्ट्र में सुधारों पर सीनेट विदेश संबंध समिति के समक्ष राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ का आरंभिक वक्तव्य

Department of State United States of America

अनुवादअमेरिकी विदेश विभाग केसौजन्य से



संयुक्तराष्ट्र में अमेरिकी मिशन
राजदूत माइक वॉल्ट्ज़
संयुक्तराष्ट्र में अमेरिकी दूत
न्यूयॉर्क
अप्रैल 15, 2026

यथा संबोधित

धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय, रैंकिंग सदस्य शाहीन, और समिति के सदस्यों। आज अपने समक्ष उपस्थित होने का अवसर देने के लिए मैं आपका आभारी हूं। मेरा मानना है कि इस संगठन में सुधारों की दिशा में हमने कई ठोस कदम उठाए हैं।

मैं शुरुआत में ही यह कहना चाहूंगा कि हम सुधारों को आगे बढ़ाते समय इस समिति के नाम का, तथा आपका और रैंकिंग सदस्य का अक्सर उल्लेख करते हैं। आपकी निगरानी न्यूयॉर्क में हमारी स्थिति को मज़बूत करती है, जब मैं, राजदूत बार्टोस और हमारी टीम संयुक्तराष्ट्र पर अमेरिकी धन के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए दबाव डालते हैं। मैं उन्हें याद दिलाता हूं कि अमेरिकी सीनेट और अमेरिकी जनता इस पर नज़र रख रही है।

माननीय सीनेटरों, पिछले साल अमेरिकी जनता ने राष्ट्रपति ट्रंप को इस स्पष्ट जनादेश के साथ व्हाइट हाउस में वापस भेजा कि हमारी विदेश नीति में अमेरिका फ़र्स्ट को प्राथमिकता दी जाए। इसमें संयुक्तराष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की गहन समीक्षा भी शामिल थी। शुरू से ही अमेरिकियों ने इसे एक सरल कसौटी पर परखा: यदि अमेरिका संयुक्तराष्ट्र का सबसे बड़ा वित्तपोषक – संयुक्तराष्ट्र के लिए अपनी मेहनत की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा देने वाला देश – है तो संयुक्तराष्ट्र को अमेरिकी हितों के लिए काम करना होगा।

अब, 80 साल बाद, सच कहूं तो संयुक्तराष्ट्र अपने रास्ते से भटक गया है। पिछले 25 सालों में, निर्धारित और स्वैच्छिक योगदान के मामले में इसका बजट चार गुना बढ़ गया है, फिर भी हमने शांति में चार गुना बढ़ोतरी नहीं देखी है। युद्ध भड़क रहे हैं, मानवाधिकार एजेंसियां तानाशाही शासनों को सम्मानित कर रही हैं, नौकरशाही बढ़ी है, और नतीजे अपेक्षा से कम रहे हैं।

इस बीच, संयुक्तराष्ट्र (यूएन) बुनियादी बातों – शांति और सुरक्षा – पर ध्यान देने के बजाय अपने 2030 एजेंडा से लेकर नाकाम हो रहे – खुद महासचिव मान चुके हैं – सतत विकास लक्ष्यों जैसे महंगे वैचारिक एजेंडों को आगे बढ़ा रहा है।

इसलिए हां, अमेरिकी पूछते हैं – मुझे लगता है कि हमारे परिवारों के सदस्य, हमारे वोटर पूछते हैं कि क्या यह सब करना सही है? क्या उनका पैसा सही जगह ख़र्च हो रहा है?

सच कहूं तो, जब मैं पहली बार न्यूयॉर्क पहुंचा, तो मैंने भी यही सवाल किया था। जब राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझे इस पद के लिए नामित किया, तो उनका उत्तर स्पष्ट था: यूएन में अपार क्षमता है, लेकिन उसे अपना काम सही ढंग से करना होगा। उसे अपनी क्षमता को पहचानना होगा।

तो मेरा काम, हमारे मिशन का काम, यूएन को वापस बुनियादी बातों – संघर्षों को ख़त्म करना, शांति बनाए रखना और लोगों तक जीवनरक्षक मदद पहुंचाना – पर वापस लाना है। और इस दिशा में, हमें कुछ उल्लेखनीय सफलताएं भी मिली हैं।

गाज़ा की बात करूं तो जब हमने कार्यभार संभाला, वहां ज़ोरों से युद्ध चल रहा था। अमेरिकियों समेत दर्जनों बंधक उन भयावह सुरंगों में फंसे थे, जहां उन्हें अपनी ही क़ब्रें खोदने पर मजबूर किया जा रहा था, और मदद पहुंचाने का काम रुका पड़ा था। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस स्थिति को बदल दिया। उन्होंने एक व्यापक 20 सूत्री शांति योजना पेश की। शर्म अल-शेख़ में फ़लस्तीनी ऑथरिटी के नेताओं समेत दुनिया भर के नेताओं ने उसकी सराहना की।

और फिर हमने उस योजना को सुरक्षा परिषद में प्रस्तुत किया, जहां बिना किसी विरोध के इसे 13-0 के बहुमत से मंज़ूरी मिल गई। अब उस शांति योजना का फ़्रेमवर्क कई काम कर रहा है। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल को आधार प्रदान करता है, इसने स्थानीय स्तर पर फ़लस्तीनी शासन व्यवस्था स्थापित किया है, और जब से यह योजना लागू हुई है, तब से मानवीय सहायता का प्रवाह जारी है जो यूएन के अपने मानकों से भी कहीं अधिक है। और अब आपके पास विश्व बैंक द्वारा प्रबंधित एक कोष है, जो पुनर्निर्माण पर केंद्रित है; जिसकी फ़ंडिंग मुख्य रूप से क्षेत्रीय साझेदारों द्वारा की जाती है, न कि अमेरिकी करदाताओं द्वारा।

मुझे पता है कि आपमें से कई लोगों ने पूछा है कि आगे चलकर हमारा नज़रिया और मॉडल क्या होगा। यह उसी मॉडल का उदाहरण है – अमेरिकी नेतृत्व, अमेरिकी कूटनीति, लेकिन बोझ को साझा करना और उन लोगों के लिए ठोस नतीजे हासिल करना जिनका हम प्रतिनिधित्व करते हैं।

हमने इसे हैती में भी लागू किया है, जहां हमने एक गैंग सप्रेशन फ़ोर्स के लिए समर्थन जुटाया जिसके लिए अब यूएन लॉजिस्टिक्स सहायता मुहैया करा रहा है; इससे इस प्रयास की लागत तीन चौथाई तक कम हो गई है। इसके तहत अमेरिकी सैनिक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सैनिक व्यवस्था बहाल कर रहे हैं और गैंगों का मुक़ाबला कर रहे हैं।

सूडान में, हम मानवीय सहायता गलियारों के लिए ज़ोर लगा रहे हैं। हमें लगता है कि हम इस समझौते को अंतिम रूप देने के काफ़ी क़रीब हैं। हम विभिन्न समूहों के सरदारों पर दबाव डाल रहे हैं और उन्हें खुली छूट नहीं दे रहे हैं।

पश्चिमी सहारा के मामले में, जहां 50 साल से संघर्ष चल रहा है, हम अंतत: कुछ प्रगति कर रहे हैं। एक राजनयिक के तौर पर मैंने अब यह सीखा है कि मैं अक्सर यह सवाल करता हूं कि इन सारी बैठकों का आख़िर क्या फ़ायदा है? लेकिन कभी-कभी सभी पक्षों को एक साथ बिठाना ही अपने आप में एक जीत होती है – जैसा कि हमने अभी लेबनान में देखा, और जैसा कि हमने वेस्टर्न सहारा में देखा।

इसके साथ ही, हम उन मिशनों को बंद कर रहे हैं या उनका आकार छोटा कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य अब पूरा हो चुका है – लेबनान से लेकर इराक़, यमन और कोलंबिया तक। हमने लगभग 20 करोड़ डॉलर की कटौती की है। हमने तैनात सैनिकों की संख्या भी कम की है। अब कोई भी यूएन मिशन 30 से 40 साल तक यूं ही चलता नहीं रहेगा।

और इस संबंध में एक महत्वपूर्ण सुधार की अगुवाई राजदूत बार्टोस और उनकी टीम ने की है। हम दशकों से इन शांति स्थापना मिशनों के लिए भुगतान करते आ रहे हैं। दुनिया भर में लगभग 90,000 कर्मी इन मिशनों के लिए तैनात हैं। अगर वे अपना साज़ोसामान लाते हैं, तो उन्हें उसका भुगतान मिलता है, चाहे वे उसका इस्तेमाल करें या न करें। इसलिए, उन्हें उनका कम से कम इस्तेमाल करने, रखरखाव पर कम से कम ख़र्च करने और ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाने का प्रोत्साहन मिलता था। आप यक़ीन करें या नहीं, हमें ही इस सुधार को लागू करवाना पड़ा। अब उन्हें अपने साज़ोसामान का इस्तेमाल करना ही होगा।

मानवीय सहायता के क्षेत्र में, हम साझा फ़ंडिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि इन एजेंसियों को एक ही गोदाम, एक ही जहाज़, एक ही विमान और एक ही प्रशासनिक ढांचे (बैक ऑफ़िस) का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया जा सके।

विकास कार्यों के क्षेत्र में, हम बड़े पैमाने पर निजी क्षेत्र को शामिल कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है पूंजी जुटाने के काम में आने वाली बाधाओं को कम करना, विदेशी निवेश को बढ़ावा देना, और निर्भरता नहीं बल्कि रोजगार पैदा करना। हम इसे सहायता के बजाय व्यापार (ट्रेड ओवर एड) कह रहे हैं।

हम मानक तय करने वाली प्रमुख संस्थाओं – अंतरराष्ट्रीय नियामक निकायों – के साथ लगातार जुड़े हुए हैं जैसे कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ)। लेकिन हम उन चीज़ों का पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं, जो हमारे उद्योगों के लिए नुक़सानदेह साबित हो सकती हैं, जैसे कार्बन टैक्स जिसे लगभग पूरी वैश्विक शिपिंग व्यवस्था पर थोपा जाने वाला था, और जिसके कारण हर महीने अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ता।

और अंत में, माननीय सीनेटरों, मैं यूएन के संदर्भ में बस इतना ही कहना चाहूंगा कि हमने एक महत्वपूर्ण पहल को आगे बढ़ाया है, जो एक अत्यंत विस्तृत और जटिल समिति प्रक्रिया के माध्यम से हो पाता है, जिसमें हर निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाना अनिवार्य होता है। ज़रा कल्पना कीजिए: यदि सीनेट या कांग्रेस में हर कार्य को संपन्न करने के लिए – यानि किसी भी प्रस्ताव को पारित कराने के लिए – सभी 100 सदस्यों की सर्वसम्मति अनिवार्य होती, तो क्या स्थिति होती? यूएन की कार्यप्रणाली बिल्कुल वैसी ही है। वहां केवल 60 या 100 सदस्यों ने नहीं, बल्कि 190 देशों ने हमारे साथ मिलकर, यूएन के इतिहास में पहली बार उसके बजट में कटौती को सुनिश्चित किया। इस कटौती से यूएन के समग्र बजट में आधे अरब डॉलर से भी अधिक की कमी होगी, और हमारे अंशदान में सालाना 10 करोड़ डॉलर से अधिक की कमी आएगी।

इसके नतीजे में संयुक्तराष्ट्र मुख्यालय के लगभग 3,000 नौकरशाहों की छंटनी हो जाएगी। इसके कारण दुनिया भर में शांतिरक्षक सैनिकों की संख्या 25% कम हो जाएगी, और संबंधित शांतिरक्षक यूनिट कमांडरों को उन सैनिकों को वापस उनके देश भेजने की अनुमति मिल जाएगी जो अच्छा काम नहीं कर रहे हैं, या जिन पर यौन शोषण और यौन दुर्व्यवहार तक के आरोप हैं; इस तरह वे अपनी यूनिट को साफ़-सुथरा कर पाएंगे। और सुधार के मामले में ये तो बस शुरुआत भर है।

आखिर में, मैं यही कहूंगा कि अभी हमें एक लंबा सफ़र तय करना है। हम जानते हैं कि आगे हमें अभी बहुत काम करने हैं। हमें पिछले 80 सालों में बेहिसाब बढ़ी नौकरशाही और योजनाओं को ठीक करना है। उदाहरण के लिए, यूएन में काम करने वाले नौकरशाहों को समान पद पर काम करने वाले किसी अमेरिकी कर्मचारी के मुक़ाबले 117% ज़्यादा वेतन मिलता है। उनके पेंशन कोष में 16% का योगदान दिया जाता है जबकि इस कोष में 100 अरब डॉलर से भी ज़्यादा की परिसंपत्तियां हैं। उन्हें बच्चों की प्राइवेट और सेकेंडरी स्कूल की पढ़ाई का ख़र्च भी दिया जाता है।

अमेरिकी कांग्रेस का पूर्व सदस्य होने के नाते, मैं अपने मतदाताओं के सामने खड़े होकर यह नहीं कह सकता था कि उस धन का सही इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए, हम खुले हाथ से दिए जा रहे उन फ़ायदों और भत्तों को कम करने पर विचार कर रहे हैं।

निश्चित रूप से, हमारे सामने मुश्किल चुनौती है, लेकिन इसके लिए हमारे पास एक बेहतरीन टीम है। राजदूत बार्टोस के कंधों पर यूएन में सुधार करने की एक मुश्किल ज़िम्मेदारी है, लेकिन उनके साथ समर्पित नौकरशाहों तथा विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक मज़बूत टीम काम कर रही है।

और इसी के साथ, यह कहते हुए मैं अपनी बात ख़त्म करूंगा: जब राष्ट्रपति कहते हैं कि यूएन में अपार संभावनाएं हैं, तो वे सच में ऐसा ही मानते हैं। देखिए, अगर उन संघर्षों की बात करें जो 30, 40, 50 सालों से चले आ रहे हैं, जिनमें लगे शांतिरक्षक बलों पर सालाना लगभग एक अरब डॉलर खर्च होता है, तो हमें उन्हें किसी राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ना होगा।

विदेश मंत्रालय के हमारे विशेष दूत और वहां मौजूद हमारी बेहतरीन टीम इन प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रहे हैं, और फिर हम उन शांतिरक्षक बलों और मिशनों को इन प्रक्रियाओं से जोड़ रहे हैं ताकि वे अपना काम पूरा करके वहां से हट सकें। और हम इस ज़िम्मेदारी को समान सोच वाले देशों के बीच साझा कर सकते हैं।

और अंत में, जैसा कि मैं अपने परिवार के सदस्यों से कहता हूं जो हमेशा यूएन के बारे में पूछते रहते हैं, हमें दुनिया में एक ऐसी जगह चाहिए जहां हर कोई आकर बातचीत कर सके, और मैं चाहूंगा कि वह जगह यहीं अमेरिका में हो – ब्रसेल्स, मॉस्को, बीजिंग या कहीं और नहीं।

और इसी के साथ, मैं अपनी बात ख़त्म करता हूं; आपके साथ होना मेरे लिए सम्मान की बात है।


मूल स्रोत: https://usun.usmission.gov/opening-statement-before-the-senate-foreign-relations-committee-on-un-reform/

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही

आधिकारिक माना जाना चाहिए।


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