Tuesday, March 3, 2026

विदेश मंत्री मार्को रूबियो का संवाददाता सम्मेलन

Department of State United States of America

अनुवादअमेरिकी विदेश विभाग केसौजन्य से



अमेरिकी विदेश मंत्रालय
वक्तव्य
विदेश मंत्री मार्को रूबियो
वाशिंगटन डीसी
मार्च 2, 2026

प्रमुख अंश

विदेश मंत्री रूबियो: अमेरिका ने इस अभियान को एक बहुत ही स्पष्ट लक्ष्य को ध्यान में रखकर अंजाम दिया है। मुझे अभी तक इस बारे में बहुत सारी रिपोर्टिंग देखने का मौक़ा नहीं मिला है। मुझे समझ नहीं आता कि भ्रम क्या है। मैं आपको समझाता हूं, और मैं एक बार फिर हरसंभव स्पष्टता से समझाऊंगा। शायद आप इसे उसी तरह रिपोर्ट करेंगे।

अमेरिका, ईरान की कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और उनकी नौसेना से पैदा ख़तरे को कम करने, और विशेषकर उनकी नौसैनिक संपत्तियों को ख़त्म करने के लिए अभियान चला रहा है। इस समय पूरा ध्यान इसी पर है और यह काफ़ी सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इसके पीछे की रणनीति और इसकी प्रगति पर चर्चा करने का काम मैं पेंटागन और युद्ध मंत्रालय पर छोड़ता हूं। तो, यही मिशन का स्पष्ट उद्देश्य है।

दूसरा सवाल जो मुझसे पूछा गया है वह है: अभी क्यों? देखिए, इसके दो कारण हैं। पहला यह कि यह बिल्कुल साफ़ था कि अगर ईरान पर किसी का भी – चाहे अमेरिका, इज़रायल या किसी अन्य का – हमला होता, तो वह जवाब देता, और विशेषकर अमेरिका के ख़िलाफ़ कार्रवाई करता। इसके आदेश पहले ही फ़ील्ड कमांडरों को सौंपे जा चुके थे। यह एक स्वचालित प्रक्रिया होती, और वास्तव में ऐसा ही हुआ भी। शासन के नेतृत्व से जुड़े परिसर पर आरंभिक हमले के एक घंटे के भीतर ही दक्षिण और उत्तर दोनों क्षेत्रों में मिसाइल बलों को मिसाइल दागने के लिए सक्रिय कर दिया गया था। वास्तव में, उन्हें जवाबी कार्रवाई के लिए पहले से ही तैयार रखा गया था।

तीसरा कारण हमारा ये आकलन था कि यदि हम पहले उनके हमले की प्रतीक्षा करते और उसके बाद जवाब देते, तो हमें हताहतों की कहीं बड़ी संख्या का सामना करना पड़ता। इसलिए राष्ट्रपति ने अत्यंत विवेकपूर्ण निर्णय लिया। हमें पता था कि इज़रायल की कार्रवाई होने वाली है, हमें ये भी पता था कि उसके जवाब में अमेरिकी बलों पर हमला होगा, और हमें यह भी पता था कि यदि हमने उनके हमलों से पहले ही अग्रिम कार्रवाई नहीं की, तो हमारे हताहतों की, यहां तक कि मृतकों की भी, संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। उस स्थिति में हम सब यहां इस सवाल का जवाब दे रहे होते कि जब हमें जानकारी थी, तो हमने कार्रवाई क्यों नहीं की।

दोबारा उद्देश्य की बात करें, तो इस अभियान का लक्ष्य उनकी मिसाइल क्षमता को नष्ट करना है। ईरान को ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता क्यों चाहिए? वे जो करने की कोशिश कर रहे हैं और बड़े लंबे समय से कर रहे हैं, वो यह कि पारंपरिक हथियारों की ऐसी क्षमता विकसित की जाए जो कि एक ढाल का काम करे, जिसके पीछे वे छिप सकें। मतलब, एक ऐसा समय आएगा जब उनके पास इतनी अधिक पारंपरिक मिसाइलें, इतने अधिक ड्रोन होंगे, और वे इतना व्यापक नुक़सान पहुंचाने में सक्षम होंगे कि कोई भी उनके परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध कुछ नहीं कर पाएगा। वे यही करने की कोशिश कर रहे थे, ख़ुद को ऐसी प्रतिरक्षा की स्थिति में लाना, जब क्षेत्र में उनके द्वारा मचाई जाने वाली संभावित तबाही इतनी अधिक हो कि किसी के लिए भी उनके परमाणु कार्यक्रम या उनकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं के विरुद्ध कोई क़दम उठाना असंभव हो जाए।

कुछ अनुमानों के अनुसार, वे महीने में 100 से अधिक ऐसी मिसाइलें बना रहे हैं। इसकी तुलना में हर महीने छह या सात अवरोधक (इंटरसेप्टर) मिसाइलें बनाई जा सकती हैं। तो वे महीने में सौ मिसाइलें बना सकते हैं, और इसके अतिरिक्त उनके पास हज़ारों आत्मघाती ड्रोन भी हैं। वे ये हथियार लंबे समय से बना रहे हैं। और, उल्लेखनीय है कि ऐसा वे प्रतिबंधों के बावजूद कर रहे हैं। आप इस समय जारी उनके हमलों को देखें। वे हवाई अड्डों को निशाना बना रहे हैं। वे होटलों पर हमला कर रहे हैं। वे केवल सैन्य ठिकानों पर ही नहीं, बल्कि सीधे हमारे दूतावासों पर भी हमला कर रहे हैं। वे उन केंद्रों को भी निशाना बना रहे हैं जिनका युद्ध या सैन्य गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है।

और यह एक कमज़ोर ईरान है। वर्षों से प्रतिबंधों को झेल रहा ईरान। कल्पना कीजिए कि आज से एक साल या डेढ़ साल बाद उनके पास हमें नुक़सान पहुंचाने की क्या क्षमता होती। यह एक अस्वीकार्य जोखिम है, खासकर एक ऐसे शासन से जिसे कट्टरपंथी मौलवी चला रहे हैं। अयातुल्ला एक कट्टरपंथी मौलवी थे। वहां का पूरा शासन कट्टरपंथी मौलवियों के हाथों में है जो भूराजनीतिक स्थियों के आधार पर नहीं, बल्कि अपने धर्मशास्त्र के आधार पर, धर्मशास्त्र की अपनी व्याख्या – जो कि प्रलयंकारी है – के आधार पर निर्णय लेते हैं। इसे भी बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

तो, इस पूरे अभियान का यही उद्देश्य था। यह इसी पर केंद्रित है। जैसा कि राष्ट्रपति ने आज पहले कहा, यह तयशुदा समय से या उससे आगे चल रहा है। सामरिक स्तर पर प्रगति की चर्चा मैं युद्ध मंत्रालय पर छोड़ता हूं। किंतु यह सही निर्णय था और दुनिया की सुरक्षा एवं सलामती के लिए एक अहम फ़ैसला।


मूल स्रोत: https://www.state.gov/releases/office-of-the-spokesperson/2026/03/secretary-of-state-marco-rubio-remarks-to-press-6

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।


This email was sent to stevenmagallanes520.nims@blogger.com using GovDelivery Communications Cloud on behalf of: Department of State Office of International Media Engagement · 2201 C Street, NW · Washington, DC · 20520 GovDelivery logo

No comments:

Page List

Blog Archive

Search This Blog

Monument Traders ar going LIVE in FIVE

New Announcement ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ...