Friday, March 13, 2026

ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी: ईरान के आतंकी शासन को कुचलने के लिए अमेरिका की निर्णायक कार्रवाई

Department of State United States of America

अनुवादअमेरिकी विदेश विभाग केसौजन्य से



व्हाइट हाउस
मार्च 12, 2026

राष्ट्रपति डोनल्ड जे. ट्रंप के अटूट नेतृत्व में, अमेरिकी सशस्त्र बल ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी को अपार शक्ति, घातक सटीकता और अटूट संकल्प के साथ अंजाम दे रहे हैं। इस ऐतिहासिक अभियान के शुरुआती घंटों से ही उद्देश्य स्पष्ट थे: ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ज़ख़ीरे और उत्पादन क्षमता को मिटाना, उसकी नौसेना को नेस्तनाबूद करना, आतंकवादी प्रतिनिधियों के लिए उसके समर्थन को ख़त्म करना और यह सुनिश्चित करना कि आतंकवाद का दुनिया का अग्रणी राज्य प्रायोजक कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

अभियान की शुरुआत से ही ये उद्देश्य अपरिवर्तित, स्पष्ट और एक समान बने हुए हैं:

  • राष्ट्रपति ट्रंप (2 मार्च): "हमारे उद्देश्य स्पष्ट हैं। पहला, हम ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट कर रहे हैं… और नई मिसाइलें बनाने की उनकी क्षमता को भी — वे काफ़ी अच्छी मिसाइलें बनाते हैं। दूसरा, हम उनकी नौसेना को नेस्तनाबूद कर रहे हैं… तीसरा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आतंकवाद का दुनिया का नंबर राज्य प्रायोजक कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके… और अंत में, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरानी शासन अपनी सीमाओं के बाहर आतंकवादी सेनाओं को हथियार, धन और निर्देश देना जारी न रख सके।"
  • उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (2 मार्च): "ईरानी शासन के साथ किसी भी रूप में जो कुछ भी होता है, वह राष्ट्रपति के मुख्य उद्देश्य के लिए गौण है — मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरानी आतंकवादी शासन परमाणु बम न बना सके।"
  • विदेश मंत्री मार्को रूबियो (2 मार्च): "अमेरिका ईरान की कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और उसकी नौसेना से पैदा ख़तरे को मिटाने  के लिए अभियान चला रहा है… यह इस मिशन का स्पष्ट उद्देश्य है।"
  • अमेरिकी सेंट्रल कमान के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर (3 मार्च): "मध्य पूर्व में हमारी सेना अमेरिकियों को डराने-धमकाने की ईरान की क्षमता – जैसा कि वे लगभग आधी सदी से करते आ रहे हैं – को ख़त्म करने के लिए एक अभूतपूर्व अभियान चला रही है।"
  • नीतिगत मामलों के अवर युद्ध मंत्री एलब्रिज कोल्बी (3 मार्च): "मैं एक बार फिर इस सैन्य अभियान के उद्देश्यों को रेखांकित कर सकता हूं… जो मुख्य रूप से इस्लामिक गणराज्य की सैन्य ताक़त प्रदर्शित करने की क्षमता से निपटने पर केंद्रित हैं… जो कि मुख्य रूप से इस्लामिक गणराज्य के मिसाइलों की वजह से है, जो ज़ाहिर तौर पर काफ़ी बढ़ रही थीं और एक बहुत गंभीर खतरा पैदा कर रही थीं… साथ ही उनकी उत्पादन क्षमता और ईरानी नौसेना भी।"
  • विदेश मंत्री रूबियो (3 मार्च): "हमारे उद्देश्य वही हैं, जिन्हें शुरू में स्पष्ट किया गया था और जिन्हें राष्ट्रपति ने कल फिर स्पष्ट रूप से रेखांकित किया: ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा, और हम उसे बड़े पैमाने पर कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के भंडार या उन्हें बनाने या दागने की क्षमता को ढाल बनाने नहीं देंगे… साथ ही उसकी नौसेना का विनाश भी हमारा लक्ष्य है।"
  • युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ (4 मार्च): "हमारा मिशन बिल्कुल स्पष्ट है: ईरान की मिसाइलों और ड्रोनों और उनके उत्पादन केंद्रों को पूरी तरह से नष्ट कर देना; उसकी नौसेना और अहम सुरक्षा ढांचे को तबाह कर देना; और परमाणु हथियार हासिल करने के उसके रास्ते को मिटा देना। ईरान के पास कभी भी परमाणु बम नहीं होगा।"
  • ज्वाइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के अध्यक्ष जनरल डैन केन (4 मार्च): "इस अभियान को स्पष्ट सैन्य उद्देश्यों के साथ शुरू किया गया है, जिसका लक्ष्य इस समय और भविष्य में अपनी सीमाओं के बाहर ताक़त प्रदर्शित करने की ईरान की क्षमता को ख़त्म करना है। पहला, हम ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों को निशाना बनाकर उन्हें ख़त्म कर रहे हैं ताकि वे क्षेत्र में अमेरिकी बलों, साझेदारों और हितों को ख़तरा न पहुंचा सकें। दूसरा, हम ईरानी नौसेना को नष्ट कर रहे हैं और उसकी क्षमता और अभियान चलाने की क़ाबिलियत को कमज़ोर कर रहे हैं… तीसरा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान अपनी युद्धक क्षमता को तेज़ी से दोबारा खड़ा या पुनर्गठित न कर सके।"
  • प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (4 मार्च): "पिछले हफ़्ते शुरू ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी के आरंभ के वक़्त राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी जनता के सामने स्पष्ट उद्देश्यों को रेखांकित किया था कि अमेरिकी सेना इन बड़ी युद्धक कार्रवाइयों के ज़रिए क्या हासिल करना चाहती है। पहला, ईरानी शासन की घातक बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना और उनके मिसाइल उद्योग को पूरी तरह से ज़मींदोज़ कर देना। दूसरा, ईरानी शासन की नौसेना को पूरी तरह से ख़त्म कर देना… तीसरा, ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी यह सुनिश्चित करेगा कि शासन के आतंकवादी प्रतिनिधि अब इस क्षेत्र या आज़ाद दुनिया को अस्थिर न कर सकें और हमारी सेनाओं पर हमला न कर सकें… चौथा, यह मिशन इस बात की गारंटी देगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।"
  • एडमिरल कूपर (5 मार्च): "हम भविष्य के लिए ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता को व्यवस्थित रूप से ध्वस्त कर देंगे, और यह प्रक्रिया पूरी तरह से जारी है…"
  • लेविट (6 मार्च): "हम उन उद्देश्यों को पाने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं: ईरान की नौसेना को पूरी तरह ध्वस्त करना… बैलिस्टिक मिसाइलों के उस ख़तरे को ख़त्म करना जो ईरान ने अमेरिका और उस क्षेत्र में हमारे सैनिकों और ठिकानों के लिए पैदा किया था… यह पक्का करना कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके, और साथ ही इस क्षेत्र में उसके प्रतिनिधि समूहों को गंभीर रूप से कमज़ोर करना।"
  • विदेश मंत्री रूबियो (9 मार्च): "अमेरिकी लोगों को यह याद दिलाते रहना ज़रूरी है कि वैश्विक इतिहास की महानतम सेना इस अभियान में क्यों लगी हुई है। इसका मक़सद ईरानी शासन की मिसाइलें दागने की क्षमता को ख़त्म करना है — उनकी मिसाइलों और लॉन्चरों को और उन्हें बनाने वाली फैक्ट्रियों को नष्ट करके, तथा उनकी नौसेना को ध्वस्त करके।"
  • युद्ध मंत्री हेगसेथ (10 मार्च): " सीधे-सादे हैं और हम उन्हें मारक सटीकता के साथ पूरा कर रहे हैं। पहला, उनके मिसाइल भंडारों, उनके मिसाइल लॉन्चरों और उनके रक्षा औद्योगिक आधार – यानी मिसाइलों और उन्हें बनाने की क्षमता – को नष्ट करना। दूसरा, उनकी नौसेना को नष्ट करना। और तीसरा, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हमेशा के लिए रोकना।"
  • जनरल केन (10 मार्च): "संयुक्त बल तीन सैन्य उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित किए हुए है…"
  • लेविट (10 मार्च): "आगे बढ़ते हुए, ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी के घोषित उद्देश्य वही बने हुए हैं: आतंकवादी ईरानी शासन की बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना, उनके मिसाइल उद्योग को पूरी तरह ज़मींदोज़ करना, यह सुनिश्चित करना कि उनके आतंकवादी प्रतिनिधि अब उस क्षेत्र को अस्थिर न कर सकें, और यह पक्का करना कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर पाए।"

मूल स्रोत: https://www.whitehouse.gov/articles/2026/03/operation-epic-fury-decisive-american-power-to-crush-irans-terror-regime/

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।

 


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