Monday, February 9, 2026

परमाणु हथियार नियंत्रण का अगला युग

Department of State United States of America

अनुवादअमेरिकी विदेश विभाग केसौजन्य से



अमेरिकी विदेश मंत्रालय
प्रवक्ता का कार्यालय
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो
फ़रवरी 6, 2026

शीतयुद्ध के दौरान, परमाणु हथियारों के विशाल भंडार को सीमित करने और कम करने के लिए अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हुई वार्ताओं जितनी जटिल वार्ताएं बहुत कम हुई हैं। इन वार्ताओं के लिए ऐसे विरोधियों के बीच विश्वास की आवश्यकता थी, जिनके पास एक-दूसरे की बातों पर भरोसा करने के बहुत कम कारण थे, और इनके पालन को सुनिश्चित करने के लिए जटिल तथा निरंतर सत्यापन वाली प्रणालियों पर निर्भर रहना पड़ा। पर अमेरिकी राजनेताओं ने हिम्मत नहीं हारी और पहले सोवियत संघ तथा बाद में रूसी संघ के साथ कई समझौते किए, जिनसे अमेरिका ज़्यादा सुरक्षित हुआ।

लेकिन हर चीज़ का एक समय होता है, और कल 'न्यू स्टार्ट' संधि की अवधि ख़त्म हो गई। हथियार नियंत्रण के समर्थकों और मीडिया के कई लोगों ने इस समाप्ति को इस तरह पेश करने की कोशिश की है कि अमेरिका परमाणु हथियारों की एक नई होड़ शुरू कर रहा है। ये चिंताएं इस तथ्य की अनदेखी करती हैं कि रूस ने 2023 में ही न्यू स्टार्ट संधि का अनुपालन रोक दिया था, और उससे पहले वर्षों तक वह इसकी शर्तों का उल्लंघन करता रहा। किसी भी संधि में कम से कम दो पक्षों की आवश्यकता होती है, और अमेरिका के सामने विकल्प यह था कि वह एकतरफा रूप से संधि से बंधा रहे या यह स्वीकार करे कि एक नए युग के लिए एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है। वही पुरानी स्टार्ट संधि नहीं, बल्कि एक नई संधि। ऐसी संधि, जो इस वास्तविकता को प्रतिबिंबित करे कि अमेरिका को शीघ्र ही एक नहीं, बल्कि रूस और चीन के रूप में दो परमाणु समकक्षों का सामना करना पड़ सकता है।

न्यू स्टार्ट संधि के लागू होने के बाद से चीन द्वारा अपने परमाणु शस्त्रागार के तेज़ और अपारदर्शी विस्तार ने अमेरिका और रूस के बीच द्विपक्षीय समझौतों पर आधारित हथियार नियंत्रण के पुराने मॉडलों को अप्रासंगिक बना दिया है। 2020 के बाद से चीन ने अपने परमाणु हथियारों के भंडार को क़रीब 200 से बढ़ाकर 600 से अधिक कर लिया है, और 2030 तक वह 1,000 से अधिक वॉरहेड्स रखने की राह पर है। ऐसी कोई भी हथियार नियंत्रण व्यवस्था जो चीन के तेज़ी से बढ़ते हथियार भंडार – जिसका रूस समर्थन कर रहा है – को ध्यान में नहीं रखती, बेशक अमेरिका और हमारे सहयोगियों को कम सुरक्षित बनाएगी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट, निरंतर और दोटूक शब्दों में कहा है कि भविष्य के हथियार नियंत्रण में एक नहीं, बल्कि दोनों परमाणु समकक्षों के शस्त्रागारों को शामिल किया जाना चाहिए।

बहुपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण और रणनीतिक स्थिरता वार्ताओं का आज जिनेवा में किया गया हमारा आह्वान उन्हीं सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करता है जिन्हें राष्ट्रपति ट्रंप ने निर्धारित किया है।

पहली बात, हथियार नियंत्रण अब केवल अमेरिका और रूस के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा नहीं रह सकता। जैसा कि राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है, रणनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी अन्य देशों की भी है, सबसे ज़्यादा तो चीन की। दूसरी बात, हम ऐसे किसी भी प्रावधान को स्वीकार नहीं करेंगे जो अमेरिका को नुक़सान पहुंचाए या भविष्य के किसी समझौते के प्रयास में नियमों के उल्लंघन को नज़रअंदाज़ करे। हमने अपने मानक स्पष्ट कर दिए हैं, और केवल नाम की हथियार नियंत्रण व्यवस्था के लिए हम उनसे समझौता नहीं करेंगे। तीसरी बात, हम हमेशा मज़बूती वाली स्थिति में रहकर वार्ता करेंगे। रूस और चीन को यह अपेक्षा नहीं करनी चाहिए कि जब वे अपनी ज़िम्मेदारियों से बच रहे हों और अपने परमाणु बलों का विस्तार कर रहे हों, तो अमेरिका चुपचाप खड़ा रहेगा। हम एक मज़बूत, विश्वसनीय और आधुनिकीकृत परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखेंगे। साथ ही, हम इन भयावह हथियारों की सीमित संख्या वाली दुनिया बनाने की राष्ट्रपति की सच्ची इच्छा को पूरा करने के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों के लिए प्रयास जारी रखेंगे।

हम इस बात को समझते हैं कि यह प्रक्रिया में समय लग सकता है। न्यू स्टार्ट सहित पहले के समझौतों पर सहमति बनाने में वर्षों का समय लगा था और वे दशकों की परंपराओं पर आधारित थे। साथ ही, वे दो परमाणु शक्तियों के बीच संपन्न हुए थे, न कि तीन या उससे अधिक के बीच। किंतु कोई कार्य कठिन है, इसका मतलब ये नहीं कि हमें उसके लिए कोशिश नहीं करनी चाहिए या उससे कम पर संतोष कर लेना चाहिए। राष्ट्रपति ट्रंप से अधिक कोई यह नहीं समझता कि कठिन समझौते ही अक्सर एकमात्र उचित लक्ष्य होते हैं; उन्होंने बार-बार परमाणु हथियारों की भयावह शक्ति और वैश्विक परमाणु ख़तरों को कम करने की अपनी इच्छा पर ज़ोर दिया है। आज जिनेवा में, हम ऐसे भविष्य की दिशा में पहला कदम उठा रहे हैं, जहां वैश्विक परमाणु ख़तरा वास्तव में कम होगा, न कि केवल काग़ज़ों पर। हमें आशा है कि अन्य देश भी इस प्रयास में हमारे साथ जुड़ेंगे।

(मार्को रूबियो ने 21 जनवरी 2025 को 72वें विदेश मंत्री के तौर पर शपथ ली। विदेश मंत्री एक ऐसा विदेश मंत्रालय तैयार कर रहे हैं जो अमेरिका को सबसे आगे रखता है।)


मूल स्रोत: https://statedept.substack.com/p/the-next-era-of-nuclear-arms-control

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए


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