Saturday, March 15, 2025

जी 7 विदेश मंत्रियों की शैरलेवॉय में हुई बैठक का बयान

Department of State United States of America

अनुवादअमेरिकी विदेश विभाग केसौजन्य से



अमेरिकी विदेश विभाग
प्रवक्ता कार्यालय
मीडिया नोट
मार्च 14, 2025

हिस्से

इस बयान का हिस्सा जारी किया है जी 7 देशों के विदेश मंत्रियों ने जिसमें शामिल हैं कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंग्डम, संयुक्त राज्य  अमेरिका और यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि।

टेक्स्ट

यूक्रेन की लंबी-अवधि की समृद्धि और सुरक्षा

जी 7 सदस्य पुष्टि करते हैं अटूटन समर्थन यूक्रेन की आज़ादी, संप्रभुता और आज़ादी के लिए और इसके लिए कि यूक्रेन अपने इलाक़ों की अखंडता की रक्षा करे।

सदस्य देशों ने स्वागत किया है उन जारी प्रयासों का जो युद्धविराम के लिए किए जा रहे हैं, खास तौर पर 11 मार्च को अमेरिका, यूक्रेन और सऊदी अरब के बीच हुई बैठक का। जी 7 सदस्य तारीफ करते हैं यूक्रेन की तत्काल युद्धविराम की प्रतिबद्धता की, जो कि एक ज़रूरी कदम है समग्र, न्यायिक और लंबी अवधि की शांति के लिए जो संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुरूप है।

जी 7 देशों ने रूस का आह्वान किया है कि वह भी युद्धविराम के जवाब में ऐसा क़दम उठाए और उसे पूरी तरह लागू भी करे। देशों ने चर्चा की कि अगर युद्धविराम पर सहमति नहीं बनती है तो ऐसी स्थिति में रूस को क्या कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसमें और प्रतिबंध, तेल कीमतों पर रोक, साथ ही यूक्रेन को अतिरिक्त मदद और अन्य तरह की मदद जैसे मुद्दे शामिल रहे। इसमें रूस की परिसंपत्तियों से मिलने वाले राजस्व के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। जी 7 देशों ने रेखांकित किया कि किसी भी युद्धविराम में विश्वास बढ़ाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे जिसमें युद्धबंदियों और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई शामिल हैइसमें आम लोग और सेना के लोगों के साथ-साथ यूक्रेनी बच्चों की वापसी भी महत्व रखती है।

इन देशों ने ज़ोर दिया कि किसी भी युद्धविराम का सम्मान होना चाहिए और बल दिया कि मजबूत और विश्वास कर सकने वाले सुरक्षा उपाय करने की आवश्यकता है ताकि यूक्रेन आने वाले समय में किसी भी तरह के आक्रमण को रोक सके। उन्होंने कहा कि वे आर्थिक और मानवीय सहायता देना जारी रखेंगे ताकि यूक्रेन के पुनर्निर्माण में मदद मिल सके जिसमें यूक्रेन रिकवरी कांफ्रेंस का आयोजन शामिल है जो 10-11 जुलाई 2025 को रोम में होगा।

जी 7 देशों ने उत्तर कोरिया और ईरान द्वारा रूस को सामरिक सहायता दिए जाने की भर्त्सना करते हुए कहा कि चीन रूस को ऐसे उपकरण और हथियार उपलब्ध करा रहा है जिनका दोतरफ़ा इस्तेमाल हो सकता है और इस कारण रूस के इस युद्ध में चीन एक बड़ा समर्थक है जिससे रूस की सेना को मज़बूती मिल रही है। उन्होंने ज़ोर दिया कि वह मानते हैं और उनकी भावना है कि ऐसे किसी भी तीसरे देश के प्रति कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने युद्ध के प्रभावों पर चिंता जताई खास कर आम लोगों और नागरिक ढांचों को हुए नुक़सान पर। उन्होंने चर्चा की कि जवाबदेही तय होनी चाहिए और पुष्टि की कि वे साथ मिलकर काम करते रहेंगे ताकि लंबे समय की शांति का लक्ष्य पूरा हो और तय हो कि यूक्रेन लोकतांत्रिक, आज़ाद, समृद्ध और मज़बूत मुल्क बना रहे।

मध्य पूर्व में क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व

जी 7 देशों ने आहवान किया है कि हमास ने गज़ा में जिन बंदियों को रखा है, उन्हें रिहा करे और उनके अवशेषों को उनके प्रियजनों को सौंप दे। उन्होंने गज़ा के लिए लगातार मानवीय सहायता मुहैया कराने और स्थायी युद्धविराम को समर्थन देने की पुष्टि की। उन्होंने रेखांकित किया कि फलस्तीनी लोगों के लिए राजनीतिक परिदृश्य, इज़राइली फलस्तीनी संघर्ष के वार्ताओं के ज़रिए समाधान से ही संभव है जिसमें दोनों ही पक्षों की वैध आकांक्षाओं और ज़रूरतों की बात हो और मध्य पूर्व में समग्रता में शांति, समृद्धि और स्थायित्व आए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि वेस्ट बैंक में लगातार तनाव बढ़ रहा है और इसे कम किया जाना चाहिए।

उन्होंने माना कि इज़राइल को अधिकार है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत वह अपना बचाव करे। उन्होंने एक स्वर में हमास की निंदा की जिसमें 7 अक्तूबर 2023 को किया गया क्रूर और भयावह आतंकी हमले समेत, बंदियों पर किए गए अत्याचार और हैंडओवर समारोहों के ज़रिए बंदियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसे काम शामिल रहे। उन्होंने ज़ोर दिया कि हमास की गज़ा के भविष्य में कोई भूमिका नहीं हो सकती है और अब उसे कभी भी इज़राइल के लिए खतरे के रूप में उभरने न दिया जाए। उन्होंने पुष्टि की कि वे अरब सहयोगियों के साथ गज़ा के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव पर काम करने के लिए तैयार हैं ताकि इज़राइल और फलस्तीन के बीच शांति स्थापित हो सके।

जी 7 देशों ने सीरिया और लेबनान के लोगों के प्रति अपना समर्थन देते हुए कहा है कि दोनों देश शांतिपूर्ण और स्थायी राजनीतिक भविष्य के लिए काम करें। इस महत्वपूर्ण मोड़ पर, उन्होंने ज़ोर दिया कि सीरिया और लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का बहुत महत्व है। उन्होंने सीरिया के तटीय इलाकों में हाल में बढ़ी हिंसा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और हिंसा करने वालों को सज़ा मिले। उन्होंने समावेशी और सीरियाई नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया के महत्व पर ज़ोर दिया और इसका स्वागत किया कि सीरियाई अंतरिम सरकार ने शेष सभी रासायनिक हथियारों को नष्ट करने में ओपीसीडब्ल्यू के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता के पीछे ईरान की मुख्य भूमिका है और अब ज़रूरी है कि वह इस क्षेत्र में परमाणु हथियारों का विकास न कर पाए। उनका कहना था कि ईरान अपने तौर तरीके बदले, और कूटनीति का सहारा ले। उन्होंने कहा कि ईरान मनमाने तरीके से लोगों को हिरासत में लेने और विदेशियों की हत्या कराने के तरीकों का इस्तेमाल कर के दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है जो एक बड़ा खतरा है।

एशिया प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के ज़रिए सुरक्षा और लचीलेपन को बढ़ाना

जी 7 सदस्यों ने दोहराया कि वे संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, मौलिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के आधार पर एक स्वतंत्र, खुले, समृद्ध और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने गंभीर चिंता जताई ईस्ट चाइना सी की स्थिति पर, साथ ही साउथ चाइना सी के लिए भी जहां उन्होंने किसी भी तरह की एकतरफ़ा कार्रवाई के ज़रिए यथास्थिति को बदलने की कोशिसों का विरोध किया, विशेष तौर पर बल प्रयोग या दबाव के ज़रिए। उन्होंने फ़िलिपींस और विएतनामी जहाज़ों के खिलाफ़ युद्धाभ्यास और पानी के तोपों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि यह साउथ चाइना सी में आने जाने की आज़ादी पर अंकुश लगाने का प्रयास है सैन्यीकरण और बलप्रयोग के ज़रिए जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। जी 7 देशों ने ज़ोर दिया कि ताइवान खाड़ी में शांति और सुरक्षा बनाए रखना महत्वपूर्ण काम है। उन्होंने खाड़ी के मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से हल ढूंढने पर ज़ोर दिया और कहा कि विरोधी पक्ष द्वारा यथास्थिति को बलप्रयोग के ज़रिए बदलने की किसी भी कोशिश का वे विरोध करते हैं। उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ताइवान की सहभागिता का भी समर्थन किया।

वे इस बात पर चिंतित थे कि चीन लगातार सैन्य मज़बूती के काम में लगा है और उसके परमाणु हथियारों का ज़खीरा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने चीन से कहा कि वो उन वार्ताओं में भाग ले जिससे सामरिक रूप से रिस्क को कम किया जा सके और पारदर्शिता के साथ क्षेत्र में स्थायित्व को बढ़ावा मिले।

जी 7 देशों ने ज़ोर दिया कि चीन न तो कोई ऐसा काम करे और न ही किसी ऐसे काम को समर्थन दे जिससे हमारे आसपास के समुदायों की सुरक्षा को ख़तरा पहुंचे और लोकतांत्रिक संगठनों की मज़बूती को ठेस लगे।

उन्होंने चिंता जताई कि चीन की गैर-बाज़ार नीतियां और अभ्यास से बाज़ार को नुक़सान पहुंच रहा है। जी 7 देशों ने चीन से कहा कि वो निर्यात पर कंट्रोल करने की नीतियां न अपनाए क्योंकि इससे सप्लाई चेन में बाधा आती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वो चीन को या उसकी अर्थव्यवस्था को नुक़सान नहीं पहुंचाना चाहते बल्कि एक बढ़ता हुआ चीन चाहते हैं जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करे जो वैश्विक रूचि में हो।

जी 7 देशों ने मांग की की उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के अनुसार अपने सभी परमाणु हथियार छोड़े और साथ ही किसी भी और तरह के नरसंहार के हथियार न बनाए जिसमें बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम शामिल है। उन्होंने गंभीर चिंता जताई ऊत्तर कोरिया की क्रिप्टोकरेंसी चोरियों पर और कहा कि इस पर बात करने की आवश्यकता है। उन्होंने उत्तर कोरिया से अपहरण के मामलों को तत्काल सुलझाने को कहा है।

जी 7 देशों ने म्यांमार के लोगों का स्थानीय सैन्य सरकार द्वारा क्रूर दमन की आलोचना की और कहा कि वहां सभी प्रकार की हिंसा बंद हो और मानवीय सहायता को किसी भी तरह से न रोका जाए।


मूल स्रोत: https://www.state.gov/statement-of-the-g7-foreign-ministers-meeting-in-charlevoix/

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।


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